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भगवान कृष्ण के
पवित्र वासस्थान श्रीधाम वृन्दावन,
जो कि भारत
के
सर्वाधिक सुखदायक
तथा पवित्रतम नगरों में भी
एक है, के
सन्तों
एवं धर्मिक
पुरूषों के वंश
में स्वामी श्री बालेन्दुजी का नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं
हैI उनकी पुण्यता सम्पूर्ण भारत
में प्रसिद्ध हैI
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स्वामीजी का जन्म
14
अक्टूबर,1971
को
वृन्दावन में हुआ थाI
उनके
पिता
गोस्वामी बालकराम शरण एक प्रसिद्ध उपदेशक हैं और,
आध्यात्मिक रूप से एक बहुत
प्रगतिशील व्यक्तित्व हैंI
उन्होंने अपना सारा जीवन आध्यात्मिक खोज,
नैतिक
स्तर
ऊँचा
करने एवं सार्वभौम सत्य और आध्यात्मिक ज्ञान का संदेश फैलाने के लिये
समर्पित
कर दियाI
उनके
दादा गोस्वामी श्री बिन्दुजी महाराज एक प्रसिद्ध वक्ता,
विद्वान,
लेखक,
संगीतकार एवं कवि थेI
महात्मा
गांधी ने उन्हें अनेक बार व्याख्यान देने के
लिये
आमन्त्रित कियाI
गोस्वामी श्री बिन्दुजी महाराज ने
व्याख्यान दिया जिसमें लगभग
बीस लाख
लोग शामिल
हुएI
इसलिये
स्वामीजी गहन
आध्यात्मिकता के इस वातावरण में
पल-बढ़कर
बहुत धन्य
हुएI
इसके
अतिरिक्त इस वातावरण ने बालेन्दु - शिशु
के मन
एवं हृदय में
एक अमिट छाप छोड़ी और
उद्देश्यपूर्वक आध्यात्मिकता
के गुप्त रहस्य के
प्रति
एक बढ़्ता
अभिरूचि पैदा कियाI
उनके
पिता ने अपने पुत्र की गहन
आध्यात्मिक क्षमताओं को समझा
एवं
उनके गुरू बन गयेI
9 वर्ष
की कच्ची उम्र में स्वामीजी आध्यात्मिक व्याख्यान
देने
में सक्षम थे एवं
उन्होंने अपने परिवार की
परम्पराओं तथा
सन्त परम्पराओं का
अनुसरण
कियाI
1996
में स्वामीजी ने वृन्दावन में एक आश्रम की स्थापना की जहाँ गरीब
बच्चों
को भोजन, पेय
एवं शिक्षा
नि:शुल्क दिया जाता थाI
उन्हें
योग्य एवं अनुभवी
शिक्षकों से ध्यान,
संस्कृत
और योग की शिक्षा मिल्ती थीI
स्वामी बालेन्दुजी सढ़े तीन
वर्ष तक गुफा में प्रायश्चित करने
के बाद से ही आध्यात्मिक
चिकित्सा कर रहे हैI
स्वामीजी अपनी चिकित्सा
पूरी करते हैं
एवं पूरे भारत और यूरोप में भी
हठ योग तथा क्रिया योग का प्रदर्शन करते हैंI
ऊन्होंने बिना रंग,
सम्प्रदाय एवं आध्यात्मिक भेद
के अनेक आत्माओं को
आध्यात्मिक
शांति प्रदान किया
I
"Swami ji's Three Years, 108 days - Meditation in a Cave
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श्री बिन्दु सेवा संस्थान (भारत) एवं स्वामी बालेन्दु ई.वी. (जर्मनी) पंजीकृत
निर्लाभ धर्मार्थ संगठन हैं जिनका उद्देश्य भारत में गरीब बच्चों को शिक्षा प्रदान
करना हैI
सभी अनुदान कर-मुक्त हैं एवं इस प्रकार इन धर्मार्थ संगठनों की पूर्णतया सहायता करते
हैंI
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