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वृंदावन (भारत) में स्वामी जी का आश्रम

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Ashram in Vrindavan

वृंदावन उत्तर भारत में दिल्ली के लगभग 151 कि.मी. दक्षिण में स्थित है I यही वह स्थान है जहाँ भगवान कृष्ण ने अपना आरंभिक बाल्यकाल व्यतीत किया I यह भारत के सर्वाधिक आनन्ददायक एवं पवित्रतम नगरों में एक है I वृंदावन में लगभग 5000 मंदिर हैं I     

 

1995 में स्वामी जी ने वृंदावन में एक आश्रम की स्थापना की जहाँ वे 12 वर्ष से 20 वर्ष के बीच के उम्र के अनेक युवा विधार्थियों को आश्रय एवं शिक्षा प्रदान करते हैंI विद्यार्थी अनुभवी एवं योग्य शिक्षकों से योग, चिंतन एवं संस्कृत साहित्य सीखते हैं I उनकी शिक्षा एवं पूर्ण आवास नि:शुल्क है इसका यह अर्थ है कि उनके परिवार इस वित्तीय दवाब से मुक्त हैं और विधार्थी एक अनुकूल, प्रेममय एवं आध्यात्मिक वातावरण में सीखते हैं एवं बढ्ते हैं I भारत आनेवाले किसी भी दर्शनार्थियों के लिए आश्रम में भ्रमण करने एवं ठहरने के लिए स्वागत है I आश्रम बहुत खुला, मित्रवत एवं आतिथ्यकारी है I कमरे विस्तृत, पूर्णत: वातानुकूलित हैं और उनमें स्नानगृह  एवं बॊछाड. की सुविधाएँ हैं I वहाँ एक सुन्दर लॉन एवं आँगन भी है I

          जब कोई समूह योग छुट्टी पर आते हैं तो योग कक्षाएँ भी उपलब्ध रहती हैंI दर्शनार्थी अपनी खुशी से अपना समय व्यतीत करने के लिए स्वतंत्र हैI वे आश्रम की शांति एवं नि:स्तब्धता मे बैठने की इच्छा व्यक्त कर सकते हैं और अद्भुत ऊर्जा का आनन्द ले सकते हैंI आप स्वामी जी की गुफा में भी भ्रमण कर सकते हैं जहाँ उन्होंने चिन्तन करने में लगभग साढे तीन वर्ष व्यतीत कियेI यहाँ पर आप अत्यंत उच्च प्रेममय कंपन महसूस कर सकते हैं एवं इसके आरोग्यकारी गुणॊं को आत्मसात कर सकते हैं I आप वृंदावन के विभिन्न मंदिरों, अन्य आश्रमों एवं बाजारों में भ्रमण करना पसंद कर सकते हैंI आश्रम में स्वादिष्ट व्यंजन एक बहुत प्रिय ढंग से परोसे एवं बाँटे जाते हैंI

             सभी आगंतुकॊं का स्वागत है तथापि यह एक आश्रम है न कि एक होटल I हमलोगों के द्वार उनलोगों  के लिए सहर्ष खुले हैं जो आश्रम के साथ एक संबंध का अनुभव करते हैं और जो हमारी योजनाओं एवं क्रियाकलापों में रूचि रखते हैं I हम उनलोगों का स्वागत नहीं करते जिनका किसी सम्प्रदाय या उनके हेर-फेर के क्रियाकलापों से संबंध हो I

            हमारे आश्रम का उद्देश्य अपने प्रेम , भावनाओं, भोजन, कमरा एवं प्रत्येक वस्तु को बाँटना है I और हम बाँटना पसंद करते हैं ! लेकिन हम प्रत्येक अतिथि से यह भी कहना चाहते हैं कि वे अपने सामर्थ्ययोग्य राशि अनुदान में देने के बारे में विचार करें चूँकि हम अपने धन को अपने धर्मार्थ कार्य एवं आश्रम के रखरखाव के लिए निवेश करते हैं I

              एक बार एक व्यक्ति वॄंदावन भ्रमण करने की योजना बना रहा था लेकिन उसकी जेब में एक फूटी- कौड़ी नहीं थी I उसने हमसे पूछा कि क्या वह हमारे आश्रम में हमारे साथ ठहर सकता था इसलिए हमने  उसे आमंत्रित किया और वह आया एवं वहाँ रूक गया I उसने अपनी छुट्टी का भरपूर आनन्द उठाया और हमें भी उसका साथ अच्छा लगा I प्रत्येक व्यक्ति को यह अवश्य मालूम था कि वह व्यक्ति अनुदान नहीं देगा लेकिन हमें उसे इस सुंदर नगर को देखने का अवसर प्रदान कर खुशी हुई I

             लेकिन हमें यह भी अहसास हुआ कि कुछ लोग यह मान रहे हैं कि हम प्रत्येक वस्तु की भागीदारी अपने अतिथियों के साथ करते हैं I उदाहरणस्वरूप, हम यह देखते हैं कि समूचे विश्व के चारों तरफ भ्रमण करने वाले लोग हमारे आश्रम में नि:शुल्क शयन एवं भोजन करते हैं और अपने धन को वृंदावन के विभिन्न दुकानों मे उदारतापूर्वक खर्च करते हैं और अपने ठहराव के अंत में आश्रम के लिए 10 यूरो अनूदान के रूप में देते हैं I यह बात नहीं है कि हम छोटे अंशदानों का मूल्यांकन नहीं करते हैं I तथापि इसने हमारे लिये कुछ निराशा उत्पन्न किया है कि हमारे काम के लिए मिलनेवाले अनुदान गलूबन्दों एवं आभूषणों पर किए जानेवाले खर्चों के बीसवें भाग से भी कम होते हैं I कभी- कभी हम यह भी अनुभव करते हैं कि हमारे प्रेम का अनुचित लाभ उठाया जाता है I

            यहाँ पर अनेक लोग भवन तथा उधान को सुंदर एवं स्वच्छ बनाए रखने के लिए काम कर रहे हैं I हमारी धर्मार्थ योजनाएँ बढ रही हैं और हम अधिक से अधिक लोगों को हमारी उपलब्धियों को आकर देखने के लिए आमंत्रित करना चाहते हैं I लेकिन इसे बनाए रखने के लिए हमें अनुदानों की आवश्यकता है I

            हम कोई होटल नहीं हैं और न ही हम प्रति रात्रि प्रति कमरे के लिए कोई शुल्क लेते हैं I सबसे गरीब दर्शनार्थी का भी यहाँ  ठहरना हम प्रेमपूर्वक संभव करते हैं I परंतु हम अपने उन अतिथियों के द्वारा भी सराहना चाह्ते हैं जो आर्थिक रूप से बेहतर स्थिति में हैं I कृपया हमारी भावना का आदर करें कि हम कोई न्यूनतम या अधिकतम मूल्य निर्धारित नहीं करना चाह्ते हैंI प्रत्येक व्यक्ति के लिए दूसरी उपयुक्त राशि हैI

     आप जब भी कभी वृंदावन में हों, हमारे आश्रम में आकर भ्रमण करने में संकोच न करेंI

              अधिक सूचना या कमरे की बुकिंग के लिए कृपया संपर्क करें:

पूर्णेन्दू गोस्वामी               purnendu@jaisiyaram.com 

स्थान

श्री बिन्दु सेवा संस्थान
संत बिन्दु जी मार्ग ( परिक्रमा मार्ग)रामनगर, वृंदावन -281121 (उ.प्र.) भारत
फोन :
  +91-565-2442374
फॆक्स :+91-565-2442374
मोबाइल : +91-9997710000

Vrindavan Map
 

उर्पयुक्त नक्शे को विस्तृत करने के लिए क्लिक करें

दूरी कि. मी.
नई दिल्ली हवाई अड्डे 146कि. मी. (2.5 hrs.)
 मथुरा 12कि. मी.
आगरा 70कि. मी.
वृंदावन जाने का रास्ता  
टॆक्सी द्वारा दिल्ली से
बस द्वारा - सरायकाले खाँ( दिल्ली)
ट्रेन द्वारा- नई दिल्ली स्टॆशन या निजामुद्दीन स्टेशन से मथुरा; मथुरा स्टेशन से वृंदावन
जलवायु

अक्टूबर से मार्च-   शीत ऋतु( अत्यधिक व्यस्त ऋतु)
अप्रिल से जून -
    ग्रीष्म ऋतु
जुलाई से सितंबर-
 
वर्षा ऋतु ( मॊनसून)

वृंदावन में मंदिर:

वृंदावन नगर में लगभग 5000 छोटे बडे मंदिर हैंI प्रमुख मंदिर हैं - बाँके बिहारी मंदिर, गोविन्द देव मंदिर, राधा रमणजी मंदिर, रंगजी मंदिर, राधा वल्ल्भ मंदिर, मदन मोहनजी मंदिर एवं पागल बाबा मंदिर I

अन्य आकर्षण : ब्रज, नन्दगाँव, बरसाना, गोवर्धन, गोकुल, एवं दॊजी के मुख्य शहर वाहनों द्वारा आसानी से पहुँचे जा सकते हैं I

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स्वामीजी  यशेन्दु गोस्वामी  हमारा उद्देश्य  आश्रम  पवित्र गुफा  दूरस्थ चिकित्सा  आध्यात्मिक चिकित्सा  चिकित्सा सूचना  गृह/ व्यवसाय /कार्यस्थल के लिए चिकित्सा शान्ति (मौन) चिकित्सा  बच्चे का प्रायोजक 

मंत्र के लिये प्रार्थन  प्रेम ध्यान  पूजन समारोह  संस्थापक  निदेशक  दर्शन  भोजन का योगदान  जन्मदिवस समारोह  आयुर्वेदिक योग  वैदिक ज्योतिषशास्त्र  आयुर्वेदिक पाक कार्यशाल

पंचकर्म  आयुर्वेद  हमारे निकट  चक्र कार्यशाला  चक्र नृत्य पार्टी  चक्रों में संतुलन  अपने समूह को लाएँ  तन्त्र  योग  आयुर्वेदिक मालिश  स्वामीजी की डायरी  आयोजक  शाकाहार

 

 

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श्री बिन्दु सेवा संस्थान (भारत) एवं स्वामी बालेन्दु ई.वी. (जर्मनी) पंजीकृत निर्लाभ धर्मार्थ संगठन हैं जिनका उद्देश्य भारत में गरीब बच्चों को शिक्षा प्रदान करना हैI 
सभी अनुदान कर-मुक्त हैं एवं इस प्रकार इन धर्मार्थ संगठनों की पूर्णतया सहायता करते हैंI
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