आयुर्वेदिक योग पर्यटन |
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जब स्वामी जी य़ूरोप प्रथम बार आए तो उनसे पूछा गया कि वे योग के किस रूप में सिध्दहस्त थे एवं किस परंपरा से संबंधित थे? अपने बाल्यकाल के आरंभ से ही योग सीख कर एवं उसमें दक्ष होकर इन प्रश्नों को सुनकर वे चकित हुए । उन्होंने उत्तर दिया कि यदि पतंजलि, जिन्होंने 2600 वर्षों पहले योगसूत्र की रचना की, यह देखते कि इस समय योग के कितने रूप मौजूद हैं तो उन्हें आश्चर्य होता कि किस तरह लोगों ने योग पर अपना नाम अंकित कर लिया है और इसे व्यवसायिक बना दिया है । पाश्चात्य विश्व में स्वामी जी ने विभिन्न परंपराओं को एक-दूसरे शिक्षक, प्राध्यापक या गुरू का अनुसरण करते देखा I स्वामी जी, जो अपने आप को एक प्राध्यापक या गुरू नहीं बल्कि हर दूसरे व्यक्ति के समान ही एक मनुष्य समझते हैं, एक निश्चित व्याख्या का अनुसरण या एक नई परंपरा का सृजन न कर योग के मौलिक विज्ञान को पुन: फॆलाना चाह्ते हैं। वे सिर्फ भारत में दर्जनों पीढियों से पढाए जा रहे विशुध्द एवं मॊलिक योग का अनुसरण करना चाह्ते हैं ।
पाश्चात्य लोगों को वे यह जानकारी देना चाहते हैं कि वास्तव में योग क्या है? इस उद्देश्य से वे भारत की आध्यात्मिक यात्रा के लिए उन्हें आमंत्रित करते हैं । स्वामी जी के आश्रम श्री बिन्दु सेवा संस्थान में एक योग पाठ्यक्रम में भाग ले कर विश्व के दो प्राचीनतम विज्ञानों को जानकर आप आध्यात्मिकता के पथ पर चल सकते हैं । कृष्ण के पवित्र शहर वृंदावन में छुट्टी बिताएँ और आश्रम के नीरव वातावरण का आनन्द लें । आप चार सप्ताह, दो सप्ताह या एक सप्ताह का कार्यक्रम चुन सकते हैं । योग का अर्थ आपकी आत्मा का परम चेतना के साथ मिलन है I व्याख्यानों में आप प्राचीन दर्शन के बारे में सीखेंगे । प्रायोगिक योग कक्षा आप को एक स्वस्थ शरीर एवं चिन्ता एवं तनावमुक्त मन तक पहुँचने का रास्ता दिखाता है । इस तरह से योग के विभिन्न पहलुओं - हठ योग, राज योग, ज्ञान योग, कुन्डलिनी योग और भक्ति योग का प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे । इसके अतिरिक्त, ध्यान का नियमित अभ्यास होगा । संध्या समय समूह एक साथ में मंत्रोच्चारण का आनन्द उठायेंगे या चक्र नृत्य पार्टियों का मजा लेंगे ।
आप आश्रम में तैयार किए गए स्वादिष्ट, योगिक, सात्विक
भोजन करेंगे जो आपके सभी दोषों को संतुलित करने में आपकी
मदद करेगा । आयुर्वेदिक भोजन
ही शरीर को स्वस्थ बनाए रखता है। चार सप्ताह या दो सप्ताह के पाठ्यक्रम में आपको एक पंचक्रम उपचार भी मिलेगा । यह एक प्राचीन आयुर्वेदिक रोग-निदान चिकित्सा है जिसका प्रयोग रोग एवं कुपोषण द्वारा छोडे गए विषैले पदार्थों से शरीर को निर्मल करना है। पंचकर्म एक अत्यंत व्यक्तिगत उपचार है जिसका प्रभाव हर व्यक्ति पर अलग-अलग हो सकता है Iप्रतिभागियों को उनके शारीरिक संरचना एवं दोषों में असंतुलन के आधार पर समूह में बाँटा जाएगा । प्रत्येक समूह के लिए अलग-अलग उपचार आवश्यक है । पाँच विभिन्न क्रियाओं में शरीर आंतरिक एवं बाह्य रूप से शुध्द हो जाएगा । प्रत्येक व्यक्ति की आवश्यक्ताओं का विशेष ध्यान रखने के कारण पंचकर्म को समग्र स्वास्थ्य, आरोग्यता एवं स्वचिकित्सा के लाभकारी प्रभाव के लिए जाना जाता है।
इन उपचारों के लिए प्रत्येक व्यक्ति को उसकी प्रकृति के
अनुरूप एक विशेष उपहार दिया जाएगा ।
सर्वोत्तम फल की प्राप्ति के लिए आश्रम प्रत्येक प्रतिभागी
के पोषण का ध्यान रखेगा । Click here to book a course of one, two, three or four weeks
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