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मेरे प्रिय, |
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कभी आपने प्रेम किया है?
अच्छा,
आप
भाग्यशाली हैं!
शहर में प्रेम छाया है
पूर्णत:गैर-गंभीर आध्यात्मिक पार्टीI |
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लय एवं ध्वनि के माध्यम से आत्म-अन्वेषण की एक
अद्भुत यात्रा है जहाँ आप
प्राचीन पवित्र ध्वनियों एवं आधुनिक नृत्य ताल के मिश्रण का
अनुभव करेंगेI
चक्र नृत्य आधुनिक काल के रहन-सहन के तनावों को दूर करने के
विषय में हैI
कहा
जाता है कि घंटों जोशपूर्ण ढ़ंग से नृत्य करने से प्राप्त लाभ
के अतिरिक्त,
चक्र
नृत्य मन,
शरीर एवं आत्मा के बीच संपर्क के प्रति जागरूकता बढ़ाता हैI
जब
हम नृत्य
करते हैं तो हमें अपने चक्रों की सारी ऊर्जाओं का अनुभव होता
हैI प्रारंभिक
शिक्षा
(पहला
चक्र) की भावाभिव्यक्ति/मुक्ति(दूसरा चक्र),
आत्म निर्णय (तीसरा चक्र) का
उत्सव,
प्रेम(चौथा चक्र),
संवाद(पाँचवाँ चक्र) एवं परम अनुभव(छ्ठा-सातवाँ चक्र) के
इस
सहज नृत्य के द्वारा सभी चक्र संतुलित हो जाएँगेI
संगीत,
मन्त्रों एवं प्रत्येक सात चक्रों के गायन की
गूँज से मार्गदर्शित
आपको
उनके अपने ऊर्जा केन्द्रों के माध्यम से एक गतिक नृत्य यात्रा
पर ले जाया जायेगाI
क्योंकि आप प्रत्येक चक्र की आवृत्ति के अनुसार नृत्य करते हैं
विभिन्न विषयों को
अनुभव एवं ऊर्जायुक्त किया जाता हैI
चक्र ऊर्जाओं को बढ़ाने में संगीत एक मुख्य भूमिका निभाता है
क्योंकि संगीत के
सुर के कंपन मानव ऊर्जा व्यवस्था के
अनुरूप हो जाते हैंI
चक्र नृत्य में संगीत का
विभिन्न चक्रों से मेल पूर्णत:आवश्यक हैI
प्रत्येक चक्र एक विशेष आवृत्ति पर कंपन
करता है जो एक विशेष रंग के कंपन के सदृश होताI
आधार चक्र जो हमें प्रारंभिक शिक्षा
देता है वह प्राथमिक ध्वनियों
एवं बहुत निम्न स्वरों के साथ प्रतिक्रिया करता हैI
आधार चक्र के विपरीत ओर उच्च स्वर शीर्ष
चक्र,
आध्यात्मिकता से जुड़े चक्र, से
जुड़ते
हैंI
चक्र नृत्य का कोई सही तरीका नहीं है क्योंकि सबका अपना ताल
एवं लय हैI
अंदर
से
उत्पन्न होने वाले संगीत एवं नृत्य के प्रति आत्मसमर्पण कर हम
अपने स्वभाविक
ऊर्जा प्रवाह को मुक्त कर सकते हैं एवं पूर्णतया
अधिक सजीव महसूस करते हैंI
यह
संगीत को व्यक्त करने के लिये आपके नृत्य की
अपनी शैली
एवं हर चक्र के द्वारा आपको
महसूस करवाने के तरीकों पर ध्यान
केन्द्रित करने के संबंध में हैI
सब
दूसरों
की थोड़ी
जानकारी के साथ नृत्य करते हैंI
यह
निष्पादन या अच्छा दिखने के विषय में
नहीं है बल्कि अपेक्षाकृत हमारी आत्म-चेतना की अनदेखी
करने एवं
प्रयोग करने के लिये
प्रोत्साहित होने से हैI
अपने पूरे शरीर को
एक साथ धरातल
पर स्थापित करने,
दृढ़
करने,
मुक्त करने एवं प्रवाहित करने के लिये प्रयोग करेंI
चक्र नृत्य एक प्रकार का कंपन औषधि हैI
नृत्य एक आनन्द है! यह हमारे लिये प्राकृतिक है;
हम
एक धुन
सुनते हैं एवं
झूमना चाहते हैंI
यह
हमें अच्छा,
संपूर्ण, भावबोधक
तथा जुड़ा
हुआ महसूस
करवाता हैI
नृत्य हमें एक प्राकृतिक ऊँचाई देता है जिससे इंडॉर्फिन स्रावित
होता है जो
प्राकृतिक परमानन्द के
रूप में कार्य करता हैI
परमानन्द किसी भी मस्तिष्क की
अहमविहीन अवस्था हैI
यह
एक सुखदायक प्रतिक्रिया शुरू करता है जो हममे और
अधिक चाहने
की
इच्छा बनाये रखता है! इसका परिणाम प्राकृतिक ऊँचाई होता हैI
हम
अपने नृत्य की शुरूआत सदाबहार वृक्ष के बीच स्थित मूल चक्र से
करेंगे जो
हमें आधार से टिकाये रखता हैI
इस
चक्र में बहुत कबायली शक्ति है;
यह
उत्तरजीविता
प्रवृत्ति,
सुरक्षा की भावना
एवं एक समूह या समूह तादात्म्य से
जुड़ने को नियंत्रित
करता हैI
इसकी गत्यात्मक लाल ऊर्जा के प्रति जागरूक रहें क्योंकि हम एक
बहुत कबायली एवं
शारीरिक नृत्य के लिये अपने पाँव का प्रयोग करते हैं जो हमें
भूमि के फर्श के आधार
से
टिकाये रखेगाI
निर्भय एवं भावबोधक
बनें एवं नगाड़े की आवाज को हमारे अंदर
के अनियंत्रित
पशु के मनोभाव को उभाड़ने देंI
नृत्य हमारे श्रोणि के हिस्से में स्थित त्रिक-चक्र तक पहूँचती
हैI
रंग नारंगी
होता है एवं नृत्य कामुक एवं विषयासक्त होता हैI ज्योंही
जीवन शक्ति बढती है एवं
आपके शरीर
से होकर स्पंदित होती है यह आपकी कल्पनाशक्ति को रचनात्मक होने
देती हैI
उन
सभी संकोचों को भूल जायें एवं अपनी इच्छाओं में तथा अपने
श्रोणि से होकर कामुक
तथा विषयासक्त ऊर्जा का अनुभव करें एवं इसका प्रवाह होने देंI
जल
की प्रवाह ध्वनि
की
आवाज सुनें जो यह चक्र तत्व हैI
अपने आंतरिक देवत्व को विषयासक्त लय पर थिरकने
देंI
उसके बाद हमारा नृत्य नाभि के ऊपर स्थित सौर प्रतान कि तरफ खिसकता
है जहाँ
हमारा नृत्य गत्यात्मक एवं शक्तिशाली
हो जाता हैI
अग्नि तत्व से घिर जायें एवं
चमकीले पीले सौर ऊर्जा की गर्मी को
महसूस करेंI
रणमुरली,
बाँसुरी एवं सीप निर्मित
भोंपू से आवाज
एवं कंपन निकलने दें एवं आपकी कामुक
चेतना को जगाने देंI
हम
ऐसे
जागें जैसा पहले कभी न जागे हों!
ज्योंही हम अपने हृदय के केन्द्र में स्थित हृदय चक्र में
प्रवेश करते हैं,
हमारा नृत्य
सौम्य एवं प्रेममय हो जाता हैI
इस
प्रेमरूपी तालाब में अपने आप को
प्रकट होने दें एवं हमारे हृदय के केन्द्र से
होकर प्रवाहित होने वाले हरे
उपचारात्मक ऊर्जा में भिंगने
देंI
स्वयं को अपने लिये प्रेम एवं करूणा में नष्ट हो
जाने दें एवं अपने सहकर्मी नर्तकों या नर्तकियों को इस बात का
अहसास होने दें कि यह
लौकिक प्रेम कितना संक्रामक हैI
आयें,
आज
की रात एक महान प्रेमी बनें!
ज्योंही हम कंठ
के केन्द्र, कंठ
चक्र, में
अपनी चेतना को लाते हैं,
हम
अपनी
गति एवं नृत्य को आत्मा के नृत्य से जोड़ते हैंI
कंठ चक्र से होकर आत्मा व्यक्त एवं
उत्पन करती हैI
हम
अपने कंठ से राग अलापने एवं गायन करने की आवाज को सुनकर एक
चमकीले नीले प्रकाश से घिरे
अपने सृजनात्मकता का नृत्य करते हैंI
अपने वातावरण को
भूल जायें एवं अपने आपको व्यक्त करने के साथ आगे बढ़ें,
जितनी तेज आवाज में आप गायन
करना एवं राग अलापना चाहते हैं उतनी तेज आवाज में करें,
अपने गले को एक वास्तविक
व्यायाम दें,
आयें,
तालू को ऊँचा करें!
ज्योंही हम भौंह के बीच स्थित
तीसरे दृष्टि
चक्र में प्रवेश करते हैं,
हमारा
नृत्य शान्त
एवं सूक्ष्म हो जाता हैI
हमारा तीसरा दृष्टि नृत्य एक रजत प्रकाश से
घिरा होता हैI
जब
आप मन एवं स्वयं की स्पष्टता महसूस करने लगते हैं तो
बुद्धिमत्ता के
दैवी शक्तियों
के साथ नृत्य करेंI
वर्तमान क्षण के प्रति सचेत रहें एवं हमारे साथ
नृत्य का आनंद लें,
अपने मन को अन्यत्र भटकने न दें!
तब
हमारा नृत्य सिर के ऊपर
स्थित उस सबसे
पवित्र स्थान
शीर्ष चक्र
में प्रवेश
करता,
जहाँ हम और
अधिक शान्ति
के साथ नृत्य करते हैं एवं अपने आपको बैंगनी रंग
में ढ़ँक
लेते हैंI
यहाँ हम अपने आपको जगत के दूसरे सभी दैवी प्राणियों से जुड़ा
हुआ
एक
दैवी प्राणी समझते हैंI
चूँकि हम इस नृत्य को दैवी शक्ति के
प्रार्थना के रूप में अर्पित
करते हैं,
इसकी धार्मिक,
प्रेरणात्मक एवं रहस्यवादी ऊर्जाओं को महसूस करेंI
जब
आप इस अति
सुन्दर एवं आध्यात्मिक नृत्य को करते हैं तो दैवी शक्ति के
साथ एक घनिष्ठ संपर्क
बनाने की कोशिश करेंI
शहर
में प्रेम के आगमन के बारे में अधिक जानने के लिये यहाँ क्लिक
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चक्र नृत्य पार्टी के लिये प्रयुक्त होने वाले
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पहला चक्र:
सितार,
बुल्बुल तरंग (तार)
दूसरा चक्र
संतूर (तार),
जल
तरंग (जल),
बाँस की बाँसुरी
तीसरा चक्र
रणमुरली,
बाँस की बाँसुरी,
शंख (शीप का सींग),
तुरई (वायु)
चौथा चक्र
बाँस की बाँसुरी,
शहनाई (वायु),
रणमुरली,
संतूर (तार)
पाँचवाँ चक्र
मंत्र उच्चारण,
गायन
छ्ठा चक्र
घंटा (घंटा
नाद),
चिमटा (घंटा नाद),
डफली (नगाड़ा), खंजरी
(घंटा नाद)
सातवाँ चक्र
शंख (शीप का सींग) एवं घंटा नाद |
चक्र नृत्य पार्टी
स्वामीजी के द्वारा परिचय
पहला चक्र:
सितार,
बुल्बुल तरंग (तार)
दूसरा चक्र
संतूर (तार),
जल
तरंग (जल),
बाँस की बाँसुरी
तीसरा चक्र
रणमुरली,
बाँस की बाँसुरी,
शंख (शीप का सींग),
तुरई (वायु)
चौथा चक्र
बाँस की बाँसुरी,
शहनाई (वायु),
रणमुरली,
संतूर (तार)
पाँचवाँ चक्र
मंत्र उच्चारण,
गायन
छ्ठा चक्र
ंटा (घंटा
नाद),
चिमटा (घंटा नाद),
डफली (नगाड़ा), खंजरी
(घंटा नाद)
सातवाँ चक्र
शंख (शीप का सींग) एवं घंटा नाद
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