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इस शब्द की उत्पत्ति संस्कृत से हुई है एवं
इसका अर्थ दृष्टि,
देखना,
दिखाना,
शिक्षा है
I
इसका मुख्यत:
प्रयोग एक धार्मिक व्यक्ति को देखने के दृष्टान्त
के वर्णन के लिये होता हैI
दर्शन आध्यात्मिक दृष्टि या चेतना को भी सूचित करता है
जिसमें आप अपने हृदय के अंदर एक दैविक शक्ति का अनुभव करते
हैं
I
यह एक सामूहिक
ध्यान और एक सामूहिक चिकित्सा है
I
स्वामीजी के दर्शन का उद्देश्य जीवन में भावनाओं को लौटाना
हैI
वे संवेदनाओं
को अत्यधिक नियंत्रित नहीं करने के लिये मन को
प्रशिक्षित करना
चाहते
हैं
I
वे एक परिचय देते हैं कि किस तरह मस्तिष्क से हृदय तक
पहुँचा जाएI
ताकि हृदय
चक्र की बाधाओं को समाप्त किया जा सकेI
इन बाधाओं की
उत्पत्ति संवेदनाओं
एवं भावनाओं
के दमन से हुई
I इन
बाधाओं एवं इनसे उत्पन्न होनेवाली समस्याओं की
समाप्ति के लिये स्वामीजी दर्शन के लिये आमंत्रित करते हैं
I
इस प्रकार आप अपने
सच्चे आत्म को बिना संकोच एवं पूरी ईमानदारी से व्यक्त कर
सकते हैं
I
स्वामीजी ध्यान के लिये मार्गदर्शन करेंगे
जिसमें प्रत्येक व्यक्ति
उसके अपने हृदय की यात्रा करेगाI
वे तब प्रत्येक व्यक्ति के पस आयेंगे और उनके
हाथों को पकड़ेंगे तथा
उनकी आँखों में देखेंगे
I
इस समय वे मंत्रों अर्थात्
पवित्र
प्रार्थनाओं का
उच्चारण करते रहेंगे ताकि व्यक्ति विशेष के चक्रों की
ऊर्जा को
क्रियाशील किया जा सके एवं उनमें चिकित्सात्मक ऊर्जा भेजा
जा सकेI
उनका स्पर्श एवं
उनके मंत्र हृदय चक्र को अंतत:
खोलने और आंतरिक
वस्तुओं को महसूस करने के
लिये
आवश्यक ऊर्जा प्रदान करते हैंI
स्वामीजी हमेशा यह इशारा करते हैं कि यह आवश्यक है
कि प्रत्येक आंतरिक वस्तुओं के प्रवाह को जारी रहने दिया
जाये
I
इस तरह से दर्शन के
दौरान एक अद्भुत ऊर्जा होती हैI
जब लोग अपने हृदयओं को खोलते हैं तो कुछ हँस रहे
होते हैं,
दूसरे नाच रहे होते हैं,
अन्य रो रहे होते हैं क्योंकि उनका कष्ट अंतत:
समाप्त हो जाता हैI
लोग एक शान्त तथा प्रेममय ऊर्जा का अनुभव करते हैं जिससे
उन्हें
आंतरिक शांति मिलती है
I
बाधाएँ दूर हो जाती हैं एवं शारीरिक समस्यायों से आराम
मिलता है
I

कोई भी व्यक्ति अपने चक्रों में ऊर्जा
के स्तर को ऊँचा उठाने और
स्वामीजी
के साथ दर्शन के लिये आ सकता हैI
दर्शन उन लोगों के लिये भी उपयुक्त है
जिनका उनके द्वारा व्यक्तिगत उपचार हुआ है और जो फलात्मक
ऊर्जाओं को अधिक लंबे समय
तक कायम रखना चाहते हैं
I
स्वामीजी यह उपहार प्रत्येक के
लिये नि:शुल्क
उपलब्ध करवाते हैंI
उनके आश्रम एवं उनके धर्मार्थ योजनाओं के लिये अनुदानों का
स्वागत है
I
प्रत्येक
व्यक्ति जिसने स्वामीजी के साथ अद्भुत "दर्शन ऊर्जा" को
पहले ही अनुभव कर लिया हैं उसका
अपने अनुभवों को हमारे साथ बाँटने
के लिये बहुत स्वागत है ताकि हम इसे अपने वेवसाइट में
प्रकाशित कर सकें एवं हमारे दर्शक उसे पढ़ सकें और अपने आप
को आध्यात्मिक दर्शन ऊर्जा से ऊर्जित
कर सकें
I
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श्री बिन्दु सेवा संस्थान (भारत) एवं स्वामी बालेन्दु ई.वी. (जर्मनी) पंजीकृत
निर्लाभ धर्मार्थ संगठन हैं जिनका उद्देश्य भारत में गरीब बच्चों को शिक्षा प्रदान
करना हैI
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