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10
सितम्बर,
1997
को स्वामीजी ने उस गुफा
में प्रवेश किया जहाँ वे जानते थे कि वे अगले
3
वर्षों एवं
108
दिनों तक शेष विश्व
से वे पूर्णत: पृथक रहेंगेI
पृथकता के इस महत्वपूर्ण समय में अपनी
चिकित्सा शक्ति
को बढाने के लिये वे प्रतिदिन
17
घंटे तक अपने मन्त्रों का ध्यान कर रहे थेI
इस तरह
से वे संपूर्ण विश्व में लोगों की मदद करना
चाहते थे और हजारों लोग उनकी अदभुत
चिकित्सा
शक्ति
को पहले ही अनुभव कर चुके थेI
ऐसे
प्रत्येक व्यक्ति को
इस ऊर्जा की प्राप्ति सम्भव करने
के लिये,
जो स्वामीजी से व्यक्तिगत रूप से नहीं
मिल सकते,
स्वामीजी ने एक
मासिक
दूरस्थ चिकित्सा उपलब्ध
कराने का निर्णय कियाI
यह प्रत्येक पूर्णिमा को आयोजित होता
है चाहे स्वामीजी उस समय कहीं भी होI
वे
एवं सभी प्रतिभागी,
व्यक्तिगत रूप से या
समूहों में,
एक
घंटे तक ध्यान में बैठ्ते थे ताकि विश्वव भर
में दूरस्थ भावना का संचरण हो सकेI
प्रत्येक व्यक्ति अपनी तस्वीर एवं कुछ विवरण
के साथ ई-मेल भेजता है ताकि एक घंटे के
ध्यान के बाद स्वामीजी हर व्यक्ति के चेहरे
में झाँक
सके एवं अपनी चंगा
करनेवाली शक्ति
को हर व्यक्ति तक पहुंचा सकेI
अगली
दूरस्थ चिकित्सा में भाग
लेने के लिये
कृपया फ़ॉर्म भरें और
अप्नी एक तस्वीर लगायेंI
आप यह प्रत्येक महीने कर सकते
हैं जिससे
कि हमारे पास प्रत्येक
महीने में एक दूसरे से एक
बार
संपर्क करनेवाले
लोगों का एक विश्वव्यापी समूह होगाI
इस
दूरस्थ चिकित्सा का आपके लिये खर्च केवल एक
घंटे का
प्रेमपूर्ण ध्यान होगाI
अवश्य यदि आप हमारी धर्मार्थ योजनाओं का
समर्थन करना चाहते
हैं तो हमें अनुदान देने के लिये आपका स्वागत
हैI
नीचे पूर्णिमा की
तिथियों एवं स्वामीजी द्वारा
एक वर्ष तक
किये जानेवाले दूरस्थ
चिकित्सा के
स्थानों की सूची दी गयी हैI
You are welcome to give us a
Donation.
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Dates |
Place |
|
26
Oct. 2007 |
Vrindavan, INDIA |
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24
Nov. 2007 |
LUXEMBOURG |
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23
Dec. 2007 |
GERMANY |
|
22
Jan. 2008 |
GERMANY |
|
21
Feb. 2008 |
Vrindavan, INDIA |
|
21
Mar. 2008 |
Vrindavan, INDIA |
|
20
Apr. 2008 |
GERMANY |
|
20
May 2008 |
GERMANY |
|
18
Jun. 2008 |
GERMANY |
|
18
Jul. 2008 |
GERMANY |
|
16
Aug. 2008 |
GERMANY |
|
15
Sep. 2008 |
Vrindavan, INDIA |
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