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उपचार के नियम की तीन संगोष्ठियाँ
(स्तर
I
से
III)
आप जान सकते हैं कि किस
तरह से
हर कोई इन
नियमों को अपने जीवन में लागू कर सकता है एवं इस प्रकार
जीवन में
अनुकूल परिवर्तनों को शुरू रख सकता है,
जारी रख सकता है एवं सहारा दे सकता हैI
शारीरिक,
मानसिक एवं आध्यात्मिक हिस्से पर ध्यान
दिया जायेगाI
पिछले
वर्षों में पृथ्वी पर कंपन की आवृत्ति महत्वपूर्ण
रूप से बढ़ती रही एवं
अभी भी
बढ़ रही हैI
अपने आप का उपचार करने के लिये यह हर कोई
के लिये अपनी चेतना को
विकसित करना संभव एवं आवश्यक बनाता हैI
भारतीय
उपचारक स्वामी बालेन्दु जी आत्म-उपचार की विधियाँ बताते
हैंI
तीन वर्षों
से अधिक समय तक दुनिया से पृथक रहने के
चिन्तनशील एकान्तवास के दौरान उन्होंने अपनी
ऊर्जा को इन नयी आवृत्तियों के
अनुकूल बनायाI
इस
गहन एकान्तवास ने न केवल विश्व से उनके संपर्क को समझने
में उनकी पूर्णत:
मदद की बल्कि
इस ऊर्जा को समूचे विश्व में फैलाने
के लिये प्रेरित कियाI
स्वामीजी
के उपचारात्म,अक
कार्य शरीर,
मन एवं आत्मा की
अन्त:क्रिया पर आधारित
हैI
सभी शारीरिक एवं मनोवैज्ञानिक समस्या
ज्वलनशील शरीर में अवरोधों से उत्पन्न
होती हैI
हर कोई इन
अवरोधों को दूर करने एवं शरीर,
मन तथा आत्मा के तत्व का उपचार
करने के लिये इस
शक्ति का प्रयोग करने में समर्थ हैI
2001
के
बसंत में वे डॉ. माइकेल कोसैक से पहली बार
मिलेI
वे मन:कायिक औषधि
एवं
मनश्चिकित्सा में चिकित्सा विशेषज्ञ हैं
एवं पिछले
20
वर्षों से हैम्बर्ग के निकट
ल्युनबर्ग में अपने पेशे में सफलतापूर्वक
कार्य करते आ रहे हैंI
इस भेंट के साथ
विचारों एवं आध्यात्मिक उपचार विधियों के
अनुभवों का गहन आदान प्रदान शुरू हुआ
जिसकी परिणति उपचार के नियम से संबंधित
संगोष्ठियों की शृंखलाओं के विकास में हुईI
अपने रोग-विषयक कार्य के शुरू में ही
उन्होंने अपने हाथों के बीच ऊर्जा के एक तीव्र
प्रवाह को अनुभव किया,
जब उन्होंने अपने हाथ को दर्दकारक शरीर
के अंगों पर रखा,
दर्द कम हो गया एवम कभी-कभी मरीजों को दर्द
से छुटकारा भी दिलायाI
यूरोप,
संयुक्त
राज्य अमेरिका एवं सबसे अधिक पूरे भारत में
उनके अभियानों ने उन्हें एक
व्याख्यात्मक दृष्टिकोण प्रदान किया एवं
नये तथा
अधिक प्रभावकारी उपचारों के खोज
में उनकी मदद की,
जो उन्हें अनगिनत विशेषज्ञ प्रशिक्षणों में
नहीं मिल सकाI
इन
उपचारों के साथ वे लोगों की
उनके पुराने तथा नकारात्मक विचार पद्धतियों को समझने
तथा बदलने में मदद करते हैं एवं इस प्रकार
उनके स्वत: उत्पन्न समस्याओं से उनके मन
का उपचार करते हैंI
चूँकि
शरीर,
मन एवं आत्मा एक दूसरे को स्थायी रूप से
प्रभावित करते हैं,
उपचार
के नियम शारीरिक
पहलुओं पर भी ध्यान
देगाI
स्वामीजी के छोटे भाई,
यशेन्दु गोस्वामी
आध्यात्मिकता के पर्यावरण में बड़े हुये एवं
उन्होंने अपने युवावस्था में ही उपचार
प्रक्रिया के प्रति एक गंभीर अभिरुचि
विकसित कीI
वे व्यायाम एवं मुद्राओं (भाव
भंगिमाओं) जैसी तकनीकों एवं शरीर के
साथ-साथ मन में ऊर्जा के
परिवर्तन का
समर्थन
करने वाली श्वसन तकनीकों में निपुण हो गयेI
उपचार
के नियम आपको अपने अंदर उपचार के अविनाशी
स्रोत से पुन: जोड़ने की संभावना
प्रदान करते हैंI
यह अनूठा प्रशिक्षण कार्यक्रम एक महान
आंतरिक शक्ति उत्पन करने
में आपकी मदद करता है,
जिसे आप अपने आप एवं अपने जीवन के लिये और
साथ ही दूसरों की
सहायता एवं उपचार के लिये प्रयोग
कर सकते हैंI
स्तर
I
“उपचार
के आंतरिक स्रोत एवं नयी उपचार आवृत्तियों को
पहचानना"
दो
दिन की संगोष्ठी नौसिखिये एवं उपचारात्मक ऊर्जाओं के
साथ कार्य करने
वाले पहले
से ही अनुभवी लोगों को उनके अपने आंतरिक उपचारात्मक स्रोत
एवं नयी
उपचार
आवृत्तियों से
जोड़ने में मदद करता हैI
स्वामी बालेन्दुजी विनम्रतापूर्वक
प्रतिभागियों की ऊर्जा से परिचय कराते हैं
एवं उससे जोड़ने में उनकी मदद करते हैंI
ज्योंहि यह संपर्क स्थापित होता है,
उपचार होता हैI
डॉ. कोजैक आपको पुरानी,
नकारात्मक विचार पद्धतियों को पहचानने एवं
उन्हें बदलने मेम मदद करते हैं एवं इस
प्रकार आपके द्वारा स्वत:उत्पन्न समस्याओं
से आप[अके मन का उपचार करते हैंI
स्वामीजी के छोटे भाई एवं योगिक व्यायामों
में निपुण यशेन्दु गोस्वामी
शरीर में
ऊर्जा के बदलाव की मृ्दुलता
से सहायता करने वाले श्वसन
व्यायामों के साथ-साथ
मुद्राओं (भाव भंगिमाओं) की शिक्षा
देते हैंI
स्तर
II
"नयी
उपचारात्मक आवॄत्तियों
द्वारा ऊर्जा अवरोधों के प्रति
दृष्टिकोण एवं
उनकी
समाप्ति"
किस तरह हम अवरोधों को दूर करने के लिये
अपने अंदर ऊर्जा स्रोत को लक्ष्य बना
सकते हैं?
दूसरे सप्ताहांत के दौरान प्रतिभागीगण अपने
अंदर सक्रिय उपचारात्मक ऊर्जा
के प्रति ध्यान
केन्द्रित करने कि विधियों एवं उपकरणों को जान पायेंगे एवं शरीर
के
पीड़ा वाले हिस्सों में उसे निर्देशित
करेंगेI शरीर
के इन हिस्सों
में अवरोध हैं
जिसमे ऊर्जा बहुर घना
हैI
यहाँ से भेजे जाने वाले सूक्ष्म व्याप्त हो
जाने वाली
ऊर्जा के द्वारा अवरोधों को समाप्त किया जा
सकता हैI
इसे करने के लिये प्रतिभागीगण
अपने शरीर की यात्रा करेंगे,
उन स्थानों का भ्रमण करेंगे जहाँ अवरोध
ऊर्जा के
प्रवाहों को
रोकते हैं एवं शु्द्ध
तथा शक्तिशाली प्रकाश
ऊर्जा को मुक्त करते हैंI
शारीरिक के साथ-साथ मानसिक समस्याओं का
उपचार इस तरीके से किया
जा सकता हैI
हमारे
अंदर की शक्ति को मन्त्र की सहायता से
मजबूत किया जा सकता है जिसे प्रतिभागीगण
स्वामीजी से प्राप्त करेंगेI
इस प्रकार सभी स्तरों पर उपचारात्मक
प्रक्रिया शामिल
हैI
स्तर
III
"उपचारात्मक
शक्ति का पुष्टिकरण एवं दूसरों को देना"
दूसरों
को ऊर्जा देने का मतलब अपनी ऊर्जा खोना नहीं हैI
अपने अंदर महसूस करने
वाली ऊर्जा से हं दूसरों की मदद कैसे कर
सकते हैं?
तीसरा स्तर इस प्रश्न का उत्तर
देगा एवं पिछले स्तरों के में अनुभव
एवं मजबूत किये गये ऊर्जा को दूसरों को देने की
विधियों एवं तरीकों
को दिखायेगाI
यदि यह हाथों एवं स्पर्श,
साँस या मन की शक्ति
द्वारा
ऊर्जा का हस्तांतरण है तो जीवन की अपनी
ऊर्जा का अवश्य
प्रयोग नहीं होना
चाहिये अन्यथा उपचारक को शीघ्र
अपने आप के उपचार
की जरूरत होगीI
उत्तरदायी के
हस्तांतरण को संभव बनाने एवं संबंधित
व्यक्ति को अपनी ऊर्जा को हानि पहुँचाये बिना
मदद करने के संबंध में प्रतिभागीगणों को
सहायता एवं मार्गदर्शन मिलेगाI
इस तरीके
से
उपचारात्मक प्रक्रिया आपके एवं आपके आसपास के लोगों के लिये
संभव हैI
प्रथम
स्तर
23
एवं 24
अगस्त,2008
6
एवं 7
सितंबर, 2008
290
यूरो
द्वितीय
स्तर
14
एवं15 फरवरी, 2009
290
यूरो
अधिक
जानकारी आप
www.lawofhealing.com
पर प्राप्त कर सकते
हैंI
ई-मेल:
info@lawofhealing.com
डॉ.
माइकेल कोजैक से संपर्क करें - फोन:
0049 (0) 4131-6 62 52
श्री बिन्दु सेवा संस्थान (भारत) एवं स्वामी बालेन्दु ई.वी. (जर्मनी) पंजीकृत
निर्लाभ धर्मार्थ संगठन हैं जिनका उद्देश्य भारत में गरीब बच्चों को शिक्षा प्रदान
करना हैI
सभी अनुदान कर-मुक्त हैं एवं इस प्रकार इन धर्मार्थ संगठनों की पूर्णतया सहायता करते
हैंI
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