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1997 में गुफ़ा में प्रवेश करने के पूर्व मैने एक गुरु का पारंपरिक जीवन व्यतीत कियाI लेकिन तीन वर्षों एबं 108  दिनों तक गुफ़ा में मेरे एकान्तवास से एक बड़ा परिवर्तन हुआ I इसने मुझे यह समझाया कि हम सभी समान हैं और किसी भी मनुष्य को अपने आगामी से अधिक ऊँचा या अधिक महान नहीं होना चाहिये I मैं अपने आप को गुरू या स्वामी बिल्कुल नहीं समझता हूँI  हमारी आत्मा एवं हमारा प्रेम ही एक मात्र वस्तु है जो सर्वव्यापक रूप से हम सभी को एक समान बनाती है I

मैं किसी धर्म, परम्परा या संस्कृति का अनुसरण नहीं करता हूँI  प्रेम ही मेरे लिये सब कुछ है और मैं चिकित्साओं, कार्यशालाओं एवं संगोष्ठियों के माध्यम से लोगों द्वारा अनुभव किए जा रहे भौतिक, भावनात्मक एवं आध्यात्मिक विषयों में उनके मदद के लिए अपना प्रेम बाँटना चाहता हूँI

प्रेम रोग-चिकित्सा संबंधी सर्वाधिक प्रभवकारी ऊर्जा हैI यह आपको अपना ह्रदय खोलने एवं इस विश्व में अधिक स्वंतत्रतापूर्वक प्रेम देने एवं ग्रहण करने में मदद करता हैI चिकित्सा सत्र , दर्शन, कार्यशालाओं को मिलने वाले अनुदान एवं मेरे द्वारा किए जानेवाले प्रत्येक कार्य, ये सभी पूर्णत: श्री बिंदु सेवा संस्थान को अर्पित किए जाते हैंI श्री बिंदु सेवा संस्थान एक धर्मार्थ न्यास के रूप में पंजीकृत है और उनके द्वारा किए जा रहे प्रत्येक क्रियाकलाप एवं कार्य का उद्देश्य बच्चों एवं जरुरतमंद लोगों की सहायता करना हैI

मैंने अपना सारा जीवन एवं सारे क्रियाकलाप बच्चों को समर्पित कर दिया हैI वे इस विश्व के भविष्य हैंI बच्चों की सेवा ईश्वर की सेवा के समान हैI इसलिये मैंने अपनी सारी सम्पत्ति श्री बिन्दु सेवा संस्थान को उनके इस अदभुत कर्य के लिये देने का निर्णय कियाI मुझे दिये गये प्रत्येक डॉलर का सौवाँ भाग एवं पेनी एक अनुदान होंगे जो एक युवती या युवक के जीवन एवं भविष्य कि आशा बनेंगेI मैं आपको उनके भविष्य एवं आपकी आत्मा को उज्ज्वल करने के लिये प्रेम का दीप प्रज्ज्वलित करने के लिये आमन्त्रित करना चाहता हूँI

हमलोगों को बाधाओं को तोड़्ने की आवश्यकता है और हमें एक दुसरे के पास पहुँचने से डरना नहीं चाहियेI अपने प्रेम को मुक्त रूप से एक-दूसरे के पास शर्तों एवं तर्कों के बिना विचरण करने दोI
मैं प्रबोधन का विक्रय करने का प्रयास नहीं कर रहा हूँI बढ्ते हुए अनुययियों से मेरा कोइ संबंध नहीं हैI यह मेरा तरीका नहीं हैI मै सिर्फ़ आपका मित्र हूँ जो आप्के साथ प्रेम का एक निकट संबंध बनाना चाहता हूँ एवं इस अदभुत ऊर्जा को आपके साथ बाँटना चाहता हूँI मैं इस संसार में सिर्फ़ प्रेम में जीने एवं प्रेम में मरने के लिये रहना चाहता हूँI मैं अपने हाथों से उन्हें गले लगाना चाह्ता हूँ जो प्रेम मे विश्वास करते हैंI

………………स्वामीजी

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