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पवित्र गुफा में 3 वर्ष

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Swami Ji's personal diary
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संसार से आध्यात्मिक वापसी

Cave  "स्वामीजी का गुफा में तीन वर्ष, 108 दिनों तक चिंतन"I स्वामीजी की आध्यात्मिक समर्पण (तपस्या) की एक तीव्र इच्छा थीI वृंदावन में स्वामीजी के आश्रम में एक भूमिगत गुफा बनायी गयीI स्वामीजी ने गुफा में 10 सितंबर,1997 को प्रवेश किया एवं पवित्र गुफा से 24 दिसंबर, 2000 को बाहर निकलेI गुफा में महान भगवान श्री हनुमान जी महाराज को स्थापित किया गयाI गुफा में प्रवेश का कोई रास्ता नहीं था एवं अंदर जाने का एक मात्र रास्ता दीवार को तोड़्कर ही हो सकता थाI इस संबंध में स्वामीजी ने कहा : " तीन वर्षों के लिये न तो मैं किसी को देख सकूँ न ही कोई दूसरा मुझे देख सके, केवल मैं और मेरे ईश्वर ही यहाँ पूर्णतः रहें"I इसके पहले भी ये महापुरूष अनेक बार तीन से छः महीने तक मूक (मौन) रहेI तथापि जैसा उन्होंने संकेत दिया "शांति कायम रखने के समय केवल भाषा की इन्द्रियों को नियंत्रित किया गया - शेष इन्द्रियों जैसे कि दृष्टि एवं श्रवण को नियंत्रित नहीं किया किया गया तथा विचलित होता रहाI तथापि गुफा में सभी तीन इन्द्रियों को नियंत्रण में रखा जाता एवं सभी इच्छाओं तथा आदतों को ईश्वर का ध्यान करने में केन्द्रित किया जाता"I

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

तीन वर्षों तक किसी भी प्रकार का संवाद, मौखिक या लिखित, नहीं थाI भीतर कोई भी संदेश भेजना असंभव थाI इस सम्पूर्ण अवधि में इस महापुरूष ने सिर्फ़ फल एवं दूध लियाI भाग लेनेवाले लोग एक निर्धारित समय पर गुफा की खिड़्की के छिद्र से भोजन भेजा करते थेI तथापि इस खिड़्की से गुफा के अंदर या बाहर झाँकना असंभव थाI गुफा शौचालय एवं स्नानागार की सुविधाओं से सुसज्जित थाI सारिणी के अनुसार छः घंटे शयन, भोजन एवं प्रातःकालीन संस्कारों में बिताये जाते थे और शेष अठारह घंटे आध्यात्मिक समर्पण के लिये उपलब्ध थेI Swami Ji

 

 

 

 

 

 

 

Swami Ji जब स्वामीजी 24.12.2000 को गुफा से बाहर आये तो हजारों लोग उनके आश्रम में उन्हें देखकर (दर्शन) धन्य होने के लिये एकत्रित हो चुके थेI वे आध्यात्मिक रुप से और अधिक विकसित हो चुके थे एवं उन्होंने अपने चिकित्सा का कार्य आरंभ कर दियाI आज वे एक आध्यात्मिक चिकित्सक हैं एवं योग तथा ध्यान के क्षेत्र में निपुण हैI इसके लिये वे सम्पूर्ण विश्व में भ्रमण करते हैं, व्याख्यान देते हैं, योग कार्यशालाओं एवं चिकित्सा सत्र का आयोजन करते हैंI चूँकि स्वामीजी के भक्त पूरे विश्व में हैं, वे दूर-दूर तक जर्मनी, हौलैंड, डेन्मार्क, स्वीडन, स्विटजर्लैंड, फ़्रांस, ग्रीस, स्पेन, इंग्लैंड, स्कॉट्लैंड, आयरलैड, कैरीबियन, फीजी द्वीपसमूह, न्यूजीलैंड एवं ऑस्ट्रेलिया में यात्रा करते हैI

 

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